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अब महंगी होगी दाल फ्राई, बढ़ गया पूड़ी-पराठा बनाने का खर्च, जाने तेल पर क्‍यों होता है खेल

नई दिल्‍ली. महंगाई डायन एक बार फिर सुरसा की तरह मुंह फैलाने लगी है. पहले दूध महंगा हुआ, फिर टोल के दाम बढ़े और अब हमारी रसोई में भी घुस आई है. बीते एक महीने में रसोई से जुड़ी चीजों के दाम धड़ाधड़ बढ़ रहे हैं और आम आदमी की थाली महंगी होती जा रही है. खाने का तेल हो प्‍याज या टमाटर सभी की कीमतों में बड़ा उछाल दिख रहा है. सोयाबीन का तेल हो या सरसों का, सभी के दाम एक महीने के भीतर करीब 15 फीसदी बढ़ चुके हैं. इसकी वजह घरेलू भी है और विदेशी भी. यानी इस बार तेल की कीमतों पर दोतरफा मार पड़ रही है.

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अब महंगी होगी दाल फ्राई, बढ़ गया पूड़ी-पराठा बनाने का खर्च, जाने तेल पर क्‍यों होता है खेल

तेल, प्‍याज और टमाटर महंगे होने से दाल फ्राई खाना, पूड़ी-पराठे बनाना या फिर सलाद खाना भी महंगा हो गया है. तेल की कीमतों में तो महीनेभर के भीतर 15 फीसदी का बड़ा उछाल आया है, जबकि प्‍याज और टमाटर 50 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव को भी पार कर गया है. इतना ही नहीं आलू की कीमतों में भी तेजी दिख रही है, जो आम आदमी की सबसे बड़ी रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजें हैं.

क्‍यों महंगा हो रहा तेल

यह बात तो सभी को पता है कि भारत अपनी कुल खपत का 60 फीसदी से ज्‍यादा तेल बाहर से मंगाता है. अभी अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन तेल की सप्‍लाई बाधित हो गई है, जिससे रिफाइन तेल महंगा हो रहा. इसी तरह, सरकार की ओर से अनाज खरीदने वाली एजेंसी नैफेड और हैफेड ने सरसों की बंपर खरीदारी की है, जबकि किसान भी अपनी फसल बाजार में बेचने के बजाए कीमतें और बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं. दूसरी ओर, शादियों का सीजन होने से मांग लगातार बढ़ती जा रही है और सप्‍लाई कम होने से कीमतों में भी उछाल दिख रहा है. अर्जेंटीना में कामगारों का विरोध प्रदर्शन चल रहा तो ब्राजील में बाढ़ से सोयाबीन का उत्‍पादन प्रभावित हुआ है.

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प्‍याज-टमाटर-आलू आसमान की ओर

रसोई में सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल होने वाले प्‍याज, टमाटर और आलू जैसी सब्जियों के दाम लगातार आसमान की ओर जा रहे हैं. आलम ये है कि देश की सबसे बड़ी प्‍याज मंडी नासिक की लासलगांव मंडी में 17 मई को जहां प्‍याज की थोक कीमत 26 रुपये किलो थी, जो 30 रुपये किलो पहुंच गई है और खुदरा बाजार में तो 50 रुपये के आसपास बिक रहा है. टमाटर भी गुस्‍से में लाल हो रहा और जून से पहले 30-35 रुपये किलो बिक रहा टमाटर अब 50 से 60 रुपये के भाव पहुंच गया है. आलू भी ज्‍यादातर खुदरा बाजार में 30 रुपये प्रति किलो के ऊपर ही बिक रहा है, जबकि महानगरों में तो 50 तक का रेट जा रहा है. ट्रेडर्स का कहना है कि जुलाई से पहले सब्जियों की कीमतों में राहत की उम्‍मीद नहीं है.

अब महंगी होगी दाल फ्राई, बढ़ गया पूड़ी-पराठा बनाने का खर्च, जाने तेल पर क्‍यों होता है खेल

तेल पर क्‍यों होता है खेल

तेल चाहे खाने का हो या वाहनों में इस्‍तेमाल करने वाला, भारत के लिए हमेशा सिरदर्द बना रहता है. इसकी बड़ी वजह हमारी आयात पर निर्भरता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में सालाना खाने के तेल की कुल खपत करीब 2.2 करोड़ टन है. इसमें से 1.5 करोड़ टन बाहर से मंगाना पड़ता है. जाहिर है कि विदेशी बाजार में कोई भी हलचल होने पर सीधा असर हमारे आयात बिल पर पड़ेगा, जो आखिर में हमारी थाली को ही महंगा करता है. देश के किसान भी सरसों बाजार में बेचने के बजाए कीमतें और बढ़ने का इंतजार कर रहे, जबकि सरसों का भाव एमएसपी के 5,650 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर जा चुका है.

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