बिलासपुर के बड़े आवासीय प्रोजेक्ट पर गिरी गाज, 60 की मंजूरी के बीच 90 फ्लैट का खेल! TNC ने लेआउट किया निरस्त

बिलासपुर 10 सितंबर 2026। न्यायधानी बिलासपुर में निर्माणाधीन एक बड़े बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर अब बड़ी कार्रवाई हुई है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) के आयुक्त अवनीश शरण ने बिलासपुर संयुक्त संचालक कार्यालय द्वारा जारी विकास अनुज्ञा को निरस्त कर दिया है। चार सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 के नियम 25 के तहत यह कार्रवाई की गई है।
शहर के अज्ञेयनगर स्थित इस प्रोजेक्ट में रास्ते की जमीन के इस्तेमाल, स्वीकृत नक्शे में विसंगतियों, 60 की जगह 90 प्रकोष्ठ दिखाए जाने, EWS/LIG फ्लैटों के प्रावधान, पहुंच मार्ग, खुले क्षेत्र और पार्किंग सहित कई बिंदुओं पर अनियमितता सामने आने की बात जांच रिपोर्ट में कही गई है।
खास बात यह है कि शिकायत के बाद टीएनसी आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने मौके का निरीक्षण करने के साथ दस्तावेजों की जांच की और अपनी रिपोर्ट आयुक्त को सौंपी। इसके बाद बिल्डर को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया, लेकिन समिति ने उसका जवाब संतोषजनक नहीं माना।
60 फ्लैट की जगह 90 प्रकोष्ठ का मामला
जांच में सामने आई सबसे महत्वपूर्ण विसंगतियों में से एक स्वीकृत प्रकोष्ठों की संख्या से जुड़ी है।
विकास अनुज्ञा के एरिया स्टेटमेंट में आवासीय परिसर को चार तल का बताया गया था। प्रत्येक तल पर 15 प्रकोष्ठ के हिसाब से कुल 60 प्रकोष्ठ प्रस्तावित किए गए थे। लेकिन स्वीकृत अभिन्यास के कुछ हिस्सों में छह तल दर्शाए गए हैं। इस गणना के अनुसार कुल प्रकोष्ठों की संख्या 90 हो जाती है।
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस विसंगति का सीधा असर EWS और LIG प्रकोष्ठों की गणना पर भी पड़ता है। समिति ने इसे त्रुटिपूर्ण माना है।
रास्ते की जमीन को लेकर भी सवाल
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जिस जमीन का उपयोग मार्ग के रूप में किया जा रहा है, उसे आवासीय प्रोजेक्ट के लेआउट में शामिल कर लिया गया।
मामला खसरा नंबर 15/1, 157/26 और 158/30 से जुड़ा है। इन जमीनों को एकीकृत कर नया खसरा नंबर 15001 बनाया गया है। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन अनंत रियलिटी के नाम दर्ज बताई गई है।
शिकायत के अनुसार बिलासपुर विकास योजना 2031 में संबंधित भूमि का भू-उपयोग आवासीय मार्ग के रूप में दर्शाया गया है। आरोप यह भी था कि भू-उपयोग परिवर्तन के बिना ही बहुमंजिला आवासीय परिसर के निर्माण की विकास अनुज्ञा प्रदान कर दी गई।
जांच समिति ने इस मामले में कहा कि जिस भूखंड को मार्ग के रूप में उपयोग किया जा रहा है, वह पूर्व स्वीकृत अभिन्यास का अभिन्न हिस्सा है। समिति के मुताबिक इसे सुखाचार के रूप में उपयोग करने के लिए पूर्व स्वीकृत अभिन्यास में आवश्यक विधिक संशोधन कराया जाना चाहिए था, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
EWS फ्लैट के लिए जिस जमीन का शपथ पत्र, वह बिल्डर के नाम ही नहीं
प्रोजेक्ट में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित प्रावधान को लेकर भी जांच में गंभीर सवाल सामने आए।
विकास अनुज्ञा में LIG और EWS के लिए क्षेत्र सुरक्षित रखने का उल्लेख किया गया था। इसके साथ ही यह अनुमति ली गई थी कि संबंधित फ्लैटों का निर्माण प्रोजेक्ट स्थल के बजाय तिफरा स्थित खसरा नंबर 407/7 पर किया जाएगा।
इस संबंध में बिल्डर की ओर से शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया गया था। लेकिन जांच के दौरान यह बात सामने आने की बात कही गई कि जिस खसरा नंबर पर EWS फ्लैटों के निर्माण का शपथ पत्र दिया गया था, वह जमीन बिल्डर के नाम पर दर्ज नहीं थी।
जांच समिति ने EWS और LIG प्रकोष्ठों की संख्या तथा इससे संबंधित प्रावधानों को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना।
20 फीट रास्ते को नक्शे में 40 फीट दिखाने का आरोप
प्रोजेक्ट के पहुंच मार्ग को लेकर भी शिकायत की गई थी। विकास अनुज्ञा में पहुंच मार्ग की उपलब्धता 10 से 12 मीटर बताई गई थी, जबकि मौके पर ऐसा रास्ता उपलब्ध नहीं होने का दावा शिकायत में किया गया।
वहीं संबंधित खसरा नंबरों के विक्रय पत्र में रास्ते की चौड़ाई 20 फीट दर्शाए जाने की बात कही गई है। शिकायत के अनुसार विकास अनुज्ञा में इसी रास्ते को 40 फीट दर्शाया गया।
जांच समिति ने रास्ते से जुड़े दस्तावेजों और पूर्व स्वीकृत अभिन्यास का भी परीक्षण किया।
10 प्रतिशत खुला क्षेत्र और पार्किंग पर भी सवाल
बहुमंजिला आवासीय परिसर के निर्माण स्थल पर नियमानुसार आवश्यक खुले क्षेत्र को लेकर भी शिकायत सामने आई। शिकायत में कहा गया कि निर्माण स्थल पर 10 प्रतिशत खुला क्षेत्र उपलब्ध नहीं है।
इसके अलावा पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी अनियमितता की शिकायत की गई थी। जांच समिति ने मौके का निरीक्षण कर इन बिंदुओं को भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया।
नक्शे को लेकर ‘विकास सिंह’ नाम पर शिकायत
शिकायत में नक्शा तैयार करने वाले इंजीनियर के नाम को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता की ओर से दावा किया गया कि नगर पालिका निगम के अधिकृत इंजीनियर के तौर पर विकास सिंह का नाम इस्तेमाल किया गया, जबकि निगम में इस नाम के आर्किटेक्ट की उपलब्धता पर सवाल उठाया गया।
शिकायत में यह भी दावा किया गया कि संबंधित इंजीनियर का लाइसेंस नगर पालिका निगम की ओर से निलंबित किया गया है। हालांकि इस मामले में लगाए गए आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
शिकायतकर्ता ने इस मामले में अनंत रियलिटी के संचालक नमन गोयल, सुजल गोयल, राजेश अग्रवाल और इंजीनियर विकास सिंह के खिलाफ FIR की मांग भी की थी।
चार सदस्यीय समिति ने की मौके पर जांच
शिकायत मिलने के बाद TNC आयुक्त अवनीश शरण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की।
समिति के अध्यक्ष विनीत नायर, संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय रायपुर थे। इसके अलावा उप संचालक रोहित गुप्ता, प्रतीक दीक्षित और आलोक त्रिपाठी समिति के सदस्य बनाए गए थे।
समिति के सदस्यों ने बिलासपुर पहुंचकर निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इसके साथ ही विकास अनुज्ञा, नक्शे, संबंधित दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच पूरी होने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट आयुक्त को सौंपी।
बिल्डर को मिला पक्ष रखने का मौका
जांच समिति की रिपोर्ट के बाद बिल्डर को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। बिल्डर की ओर से दस्तावेजों के साथ जवाब प्रस्तुत किया गया।
बिल्डर ने स्वीकृत अभिन्यास में नंबरिंग की गड़बड़ी को सलाहकार की लिपिकीय त्रुटि बताया। लेकिन जांच समिति ने अन्य विसंगतियों और अनापत्तियों के संबंध में दिए गए जवाब को संतोषजनक नहीं माना।
समिति ने कहा कि अभिन्यास स्वीकृत करने से पहले आवेदक या आवेदक संस्था के हस्ताक्षर कराए जाते हैं। ऐसे में आवेदक संस्था अपनी जवाबदेही से पूरी तरह इंकार नहीं कर सकती।
समिति ने माना- सारवान तथ्य छिपाकर विकास अनुज्ञा ली गई
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जिस भूखंड को मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, वह पूर्व स्वीकृत अभिन्यास का अभिन्न हिस्सा है। समिति के अनुसार संबंधित आवासीय भूखंड को सुखाचार के रूप में उपयोग किए जाने के लिए पहले से स्वीकृत 14 अगस्त 1989 के अभिन्यास में आवश्यक संशोधन कराया जाना चाहिए था।
समिति के मुताबिक निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और सारवान तथ्यों के दुर्व्यपदेशन के आधार पर विकास अनुज्ञा प्राप्त की गई, जिसे विधि के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
TNC आयुक्त ने नियम 25 के तहत निरस्त की विकास अनुज्ञा
जांच समिति की रिपोर्ट और संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश की अनुशंसा के आधार पर TNC आयुक्त अवनीश शरण ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 के नियम 25 के तहत विकास अनुज्ञा निरस्त कर दी।
बताया जा रहा है कि बिलासपुर जिले में यह एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है, जिसमें TNC से स्वीकृति मिलने के बाद निर्माणाधीन बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट की विकास अनुज्ञा निरस्त की गई है।
इस कार्रवाई के बाद अब प्रोजेक्ट की स्वीकृति और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों को लेकर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। वहीं शिकायत में लगाए गए आपराधिक आरोपों पर पुलिस या संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई होने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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