Ganesh Chaturthi 2026: गणपति स्थापना के समय मूर्ति के नीचे क्यों रखते हैं अक्षत? जानिए धार्मिक नियम और सही विधि

Ganesh Chaturthi 2026— गणेश चतुर्थी पर भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापित करते समय उनके आसन के नीचे साबुत चावल (अक्षत) बिछाना अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, गणेश जी की प्रतिमा को सीधे नंगे फर्श या खाली चौकी पर रखना अशुभ होता है। अक्षत को पवित्रता, पूर्णता और अन्न-धन की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
Ganesh Chaturthi 2026: गणपति स्थापना के समय मूर्ति के नीचे क्यों रखते हैं अक्षत? जानिए धार्मिक नियम और सही विधि

आसन के नीचे चावल रखने का धार्मिक और शास्त्रीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र और पूजा पद्धति के अनुसार, विघ्नहर्ता गणेश जी की स्थापना में सूक्ष्म नियमों का पालन करना जरूरी है। अक्षत शब्द का अर्थ है ‘अ-क्षत’ यानी जो खंडित न हुआ हो। पूजन विधान में अक्षत का स्थान सर्वोपरि है:
- शुद्ध और पवित्र आधार: गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने से पहले पूजा की चौकी पर अक्षत की ढेरी या परत बनाने से वह स्थान तुरंत शुद्ध और देव-आसन के योग्य हो जाता है।
- अन्नपूर्णा और लक्ष्मी कृपा: धान यानी चावल का सीधा संबंध देवी अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी से है। स्थापना के समय अक्षत का प्रयोग करने से घर में अन्न और धन के भंडार हमेशा भरे रहते हैं।
- अखंड समृद्धि का प्रतीक: पूजा में केवल साबुत चावल का ही उपयोग किया जाता है। यह इस बात का संकेत है कि परिवार में सुख, शांति और रिश्ते कभी खंडित न हों।
अक्षत बिछाने और मूर्ति स्थापना की सही विधि
यदि आप अपने घर या पंडाल में गणपति बप्पा की स्थापना कर रहे हैं, तो इस शास्त्रीय विधि का पालन करें:
सबसे पहले पूजा की चौकी को गंगाजल से साफ करके उस पर लाल या पीला स्वच्छ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद पानी से धोकर सुखाए गए साबुत अक्षत (ध्यान रहे कि एक भी चावल टूटा हुआ न हो) की एक छोटी परत या अष्टदल कमल की आकृति बनाएं। इस अक्षत के ऊपर ही भगवान गणेश की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक स्थापित करें।
विद्वानों की राय
“हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की स्थापना से पहले उनके आसन के नीचे चावल रखने की परंपरा सनातन काल से चली आ रही है। अक्षत पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक है। बिना अक्षत के किया गया देव-आवाहन अधूरा माना जाता है।”
— ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र विशेषज्ञ
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी
गणेश उत्सव के दौरान ध्यान रखें कि प्रयोग में लाए जाने वाले चावल पूरी तरह साफ हों। बाजार से लाए गए चावलों में से टूटे हुए दानों को पहले ही अलग कर लें। स्थापना के बाद जब उत्सव समाप्त हो और विसर्जन का समय आए, तो आसन के नीचे रखे इन चावलों को जल में प्रवाहित करें या पक्षियों के लिए डाल दें। इन्हें पैर के नीचे या कचरे में जाने से बचाएं।
Sneha Reddy
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