विजय बघेल की चुनाव याचिका पर 17 सितंबर को हाईकोर्ट का फैसला, भूपेश बघेल ने की है शुरुआती स्तर पर खारिज करने की मांग

बिलासपुर 15 सितंबर 2026। दुर्ग लोकसभा चुनाव से जुड़ी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सांसद विजय बघेल के बीच कानूनी लड़ाई अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट 17 सितंबर 2026 को तय करेगा कि विजय बघेल की चुनाव याचिका पर आगे साक्ष्य और सुनवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी या भूपेश बघेल की आपत्ति स्वीकार करते हुए मामला प्रारंभिक स्तर पर ही खत्म हो जाएगा।
जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की कोर्ट में 10 सितंबर को मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान चुनाव याचिकाकर्ता विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे साक्ष्य दर्ज कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट पहुंचे थे। हालांकि, भूपेश बघेल की ओर से दाखिल आवेदन पर सुनवाई होने के कारण उस दिन साक्ष्य दर्ज नहीं हो सका।
भूपेश बघेल ने दाखिल किया आदेश 7 नियम 11 का आवेदन
सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से बताया गया कि 9 सितंबर को सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन दाखिल किया गया है। इसमें विजय बघेल की चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई है। आवेदन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का भी हवाला दिया गया है।
कोर्ट ने आवेदन पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और अब इस पर आदेश के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की है।
साक्ष्य दर्ज कराने पहुंचे थे विजय बघेल
18 अगस्त 2026 को अधिवक्ताओं की मौजूदगी में मामले को 10 सितंबर को चुनाव याचिकाकर्ता का साक्ष्य दर्ज करने के लिए निर्धारित किया गया था। तय कार्यक्रम के अनुसार विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे हाईकोर्ट पहुंचे थे।
लेकिन सुनवाई शुरू होने पर भूपेश बघेल की ओर से आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन पेश किए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद कोर्ट ने पहले इसी आवेदन पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
विजय बघेल ने उसी दिन दाखिल किया जवाब
भूपेश बघेल की ओर से आवेदन दाखिल किए जाने के बाद विजय बघेल की ओर से भी उसी दिन उसका जवाब प्रस्तुत कर दिया गया। दोनों पक्षों की सहमति से हाईकोर्ट ने आवेदन पर तत्काल सुनवाई की।
भूपेश बघेल की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिवक्ता मयंक जैन उपस्थित हुए। वहीं विजय बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता टीके झा सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
17 सितंबर को तय होगा आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के सामने अब मुख्य सवाल यह है कि भूपेश बघेल की ओर से दाखिल प्रारंभिक आपत्ति स्वीकार की जाती है या नहीं। यदि आवेदन खारिज होता है तो चुनाव याचिका की आगे सुनवाई और साक्ष्य की प्रक्रिया जारी रहेगी। वहीं आवेदन स्वीकार होने की स्थिति में याचिका प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त हो सकती है।
अब 17 सितंबर को हाईकोर्ट के आदेश से इस चुनावी विवाद की आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।
आदेश 7 नियम 11 क्या है?
सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत प्रतिवादी किसी वाद या याचिका को शुरुआती चरण में खारिज करने की मांग कर सकता है, यदि उसमें कानूनन कार्रवाई का आधार नहीं बनता या वह निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करती। इस मामले में भूपेश बघेल की ओर से इसी प्रावधान के आधार पर चुनाव याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई है।
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