विरोध और प्रशासनिक शिकायत के बावजूद शंकर नगर चौक में गणेश पंडाल का निर्माण शुरू, व्यापारियों का दावा- रोज 4 लाख लोगों पर पड़ेगा जाम का असर

रायपुर 12 सितंबर 2026। गणेश उत्सव से पहले रायपुर के शंकर नगर चौक में गणेश पंडाल को लेकर विवाद गहरा गया है। व्यापारियों और स्थानीय रहवासियों के विरोध तथा प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत दिए जाने के बावजूद आशुतोष टावर के सामने पंडाल का निर्माण शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह इलाका पहले से ही भारी यातायात दबाव वाला है और पंडाल लगने से रोजाना करीब चार लाख लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
व्यापारियों और रहवासियों ने 19 अगस्त 2026 को कलेक्टर, पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त उत्तर, नगर निगम आयुक्त, जोन आयुक्त जोन-3 और खमारडीह थाना प्रभारी को लिखित आपत्ति देकर इस स्थान पर गणेश पंडाल नहीं लगाने की मांग की थी। इसके बावजूद अब पंडाल का निर्माण शुरू होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
चौक पर पंडाल, सड़क पर पार्किंग और फिर जाम की आशंका
स्थानीय लोगों के मुताबिक शंकर नगर चौक बेहद व्यस्त इलाका है। एक ओर सेक्टर-3 शंकर नगर और दूसरी ओर सेक्टर-1 शंकर नगर है। पूरा क्षेत्र घनी आबादी वाला आवासीय और व्यावसायिक इलाका है।आशुतोष टावर में सहस्त्र अकादमी सहित अन्य शिक्षण गतिविधियां भी संचालित होती हैं। यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी आते-जाते हैं। रहवासियों का कहना है कि पंडाल लगने के बाद पार्किंग की व्यवस्था बिगड़ती है और लोग सड़क किनारे वाहन खड़े करने लगते हैं। इससे गणेश उत्सव के दौरान पहले से व्यस्त चौक पर यातायात का दबाव और बढ़ जाता है।व्यापारियों का दावा है कि पंडाल निर्माण और आयोजन के दौरान सड़क पर जाम की स्थिति बनने से प्रतिदिन करीब चार लाख लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
डीजे, धुमाल और भंडारे को लेकर भी आपत्ति
स्थानीय लोगों ने सिर्फ यातायात ही नहीं, बल्कि ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि गणेश प्रतिमा स्थापना से लेकर विसर्जन तक मुख्य सड़क पर डीजे, धुमाल, ढोल और अन्य तेज आवाज वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।इसके अलावा हर साल बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन होने से बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है। इससे सड़क पर यातायात बाधित होने के साथ आसपास के क्षेत्र में शोर और प्रदूषण बढ़ने की शिकायत रहती है।रहवासियों का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और आसपास के कारोबारियों पर पड़ता है।
2022 में उपकरण जब्ती का भी दिया हवाला
शिकायतकर्ताओं ने वर्ष 2022 की एक घटना का भी हवाला दिया है। उनके मुताबिक सड़क पर डीजे रखकर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने समिति के कुछ ध्वनि उपकरण जब्त किए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बावजूद आयोजन स्थल को लेकर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
एडीएम के पत्र के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई?
व्यापारियों और रहवासियों की शिकायत के बाद अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी, रायपुर ने 31 अगस्त 2026 को पुलिस कमिश्नर और नगर निगम आयुक्त को पत्र भेजकर आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा था। पत्र की प्रति जोन आयुक्त जोन-3 को भी दी गई थी।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और पंडाल का निर्माण शुरू हो गया। यही वजह है कि स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों का विरोध अब और तेज हो गया है।
“पंडाल लगाने वालों में कोई भी शंकर नगर का नहीं”
शंकर नगर निवासी जैन श्री संघ के संरक्षक प्रेम लूनावत का कहना है कि शंकर नगर चौक पर पंडाल लगने से पूरे आयोजन के दौरान यातायात प्रभावित होता है। उनके मुताबिक जाम के साथ ध्वनि और वायु प्रदूषण से स्थानीय परिवारों को परेशानी होती है और इसका असर विशेष रूप से बच्चों तथा बुजुर्गों पर पड़ता है।लूनावत का यह भी दावा है कि गणेश पंडाल लगाने वाली समिति के सदस्यों में कोई भी शंकर नगर का निवासी नहीं है।
पंडाल मार्गनिर्देशिका और अनुमति पर भी उठे सवाल
व्यापारियों और रहवासियों ने वर्ष 2025 की पंडाल मार्गनिर्देशिका का हवाला देते हुए कहा है कि विद्युत तारों के नीचे पंडाल लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका दावा है कि शंकर नगर चौक पर प्रस्तावित पंडाल 11 केवी विद्युत लाइन के नीचे लगाया जा रहा है।शिकायतकर्ताओं के मुताबिक मुख्य सड़क और चौक पर पंडाल की अनुमति दिए जाने की स्थिति में वैकल्पिक यातायात मार्ग की व्यवस्था भी जरूरी है। उनका यह भी दावा है कि 2026 के दिशा-निर्देशों के तहत जोन कमिश्नर, जोन-3 की ओर से पंडाल के लिए अभी तक अंतिम एनओसी या अनुमति जारी नहीं की गई है।इन दावों की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि होना अभी बाकी है।
NGT के आदेश का हवाला, अधिवक्ता ने उठाए सवाल
अधिवक्ता संदीप तिवारी ने शंकर नगर चौक पर पंडाल निर्माण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल के एक पुराने आदेश का हवाला दिया है।उनके मुताबिक छत्तीसगढ़ नागरिक संघर्ष समिति बनाम छत्तीसगढ़ शासन, O.A. No. 78/2016 (CZ) मामले में 23 सितंबर 2016 को पारित आदेश में बढ़ते यातायात को देखते हुए सड़कों पर पंडाल और स्वागत द्वार लगाए जाने पर रोक की आवश्यकता बताई गई थी। तिवारी के मुताबिक आदेश में बिना अनुमति लगाए गए ऐसे पंडाल और स्वागत द्वारों पर स्थानीय निकाय, पुलिस और जिला प्रशासन को कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए थे।तिवारी ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 26(1) के तहत NGT के आदेश या निर्णय का पालन नहीं करने पर दंड का प्रावधान है।
अब सवाल प्रशासन के सामने
शंकर नगर चौक पर पंडाल का निर्माण शुरू होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों ने पहले ही लिखित आपत्ति दर्ज करा दी थी और एडीएम ने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया था, तो इसके बावजूद निर्माण कैसे शुरू हुआ?अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह पंडाल की अनुमति, एनओसी, विद्युत सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और NGT के आदेश से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर क्या कदम उठाता है।गणेश उत्सव आस्था का पर्व है, लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि आस्था के आयोजन के नाम पर शहर के सबसे व्यस्त चौकों में से एक को जाम, शोर और अव्यवस्था के हवाले किया जाना कितना उचित है?
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