युवाओं में भी बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा, मोटापा न होने पर भी रहें सतर्क

फैटी लिवर का खतरा— शरीर से फिट दिखना हमेशा पूरी तरह स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है। फैटी लिवर और मेटाबॉलिक समस्याएं शुरुआती दौर में बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती हैं। भारत में NAFLD पर प्रकाशित एक systematic review और meta-analysis में वयस्कों में इसका pooled prevalence 38.6 प्रतिशत और बच्चों में 35.4 प्रतिशत पाया गया था। यह विश्लेषण 50 अध्ययनों के 62 datasets पर आधारित था।
युवाओं में भी बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा, मोटापा न होने पर भी रहें सतर्क

खराब जीवनशैली बन रही बड़ी वजह
लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि कम होना, ज्यादा जंक फूड और मीठे पेय का सेवन तथा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल भी फैटी लिवर के जोखिम से जुड़े हैं। प्रकाशित भारतीय meta-analysis में high-risk समूहों में NAFLD की अनुमानित prevalence 52.8 प्रतिशत थी।
फैटी लिवर को अब metabolic dysfunction-associated steatotic liver disease यानी MASLD के संदर्भ में भी देखा जाता है। इसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। कुछ मामलों में बीमारी आगे बढ़कर सूजन, fibrosis और cirrhosis जैसी गंभीर स्थिति तक पहुंच सकती है।
मोटे नहीं हैं तो भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं
फैटी लिवर को केवल मोटापे से जोड़ना सही नहीं है। एक हालिया population-based study में युवा भारतीयों में MASLD के साथ lean या कम वजन वाले लोगों की स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। अध्ययन ने metabolic parameters और liver enzymes के जरिए युवा वयस्कों में शुरुआती पहचान की जरूरत पर जोर दिया।
शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं?
फैटी लिवर की शुरुआती अवस्था में कई लोगों को कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता। कुछ लोगों में लगातार थकान, पेट फूलना या भारीपन और पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में असहजता महसूस हो सकती है। केवल इन लक्षणों के आधार पर फैटी लिवर की पुष्टि नहीं की जा सकती।
फैटी लिवर की जांच कैसे होती है?
- लिवर फंक्शन टेस्ट यानी LFT से लिवर एंजाइम की जांच की जा सकती है।
- ब्लड टेस्ट में ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल की जांच की जाती है।
- पेट का अल्ट्रासाउंड फैटी लिवर की स्क्रीनिंग में इस्तेमाल किया जाता है।
- जरूरत के अनुसार डॉक्टर FibroScan या अन्य advanced imaging की सलाह दे सकते हैं।
डॉ. ने दी सावधानी बरतने की सलाह
“कम उम्र में फैटी लिवर होने के पीछे दो मुख्य कारणों में मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता शामिल हैं। डायबिटीज, थायरॉइड और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।”
— Senior Consultant और Co-Chairperson, Institute of Liver Gastroenterology & Pancreatico Biliary Sciences, Sir Ganga Ram Hospital
वर्तमान अस्पताल प्रोफाइल उनके इसी पद की पुष्टि करती है। :contentReference[oaicite:5]{index=5}
बचाव के लिए रोजमर्रा में क्या बदलें?
- खाने में फल, सब्जियां, फाइबर और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें।
- मीठे पेय, ज्यादा चीनी, जंक फूड और ultra-processed food कम करें।
- लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें और नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
- वयस्कों के लिए सप्ताह में करीब 150 मिनट moderate physical activity का लक्ष्य रखा जा सकता है।
- पर्याप्त नींद लें और वजन तथा कमर के आसपास जमा फैट को नियंत्रित रखें।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर लगातार थकान रहती है, LFT रिपोर्ट असामान्य आती है, ब्लड शुगर या कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है या परिवार में डायबिटीज अथवा लिवर की बीमारी का इतिहास है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। किसी व्यक्ति को फैटी लिवर है या नहीं, यह केवल लक्षण देखकर तय नहीं किया जा सकता। आवश्यक जांच डॉक्टर की सलाह के अनुसार करानी चाहिए।
Sneha Reddy
A gadget enthusiast at heart, Sneha Reddy reviews the latest smartphones, apps, and automobiles. She writes detailed guides on how technology impacts daily life in India. From 5G rollouts to the latest EV launches in Chhattisgarh, Sneha ensures readers stay ahead of the curve.
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