रायपुर में 10 साल बाद संपत्तियों का सर्वे, आवासीय मकान में कारोबार मिला तो लगेगा कमर्शियल टैक्स, जानिए नगर निगम किस तरह करेगा जांच

रायपुर 8 सितंबर 2026। राजधानी में आवासीय मकानों में चल रहे व्यावसायिक कारोबार पर अब नगर निगम सख्ती करने की तैयारी में है। करीब 10 साल बाद शहर में संपत्तियों का व्यापक सर्वे कराया जाएगा। इस दौरान दुकान, कैफे, कोचिंग सेंटर, रेस्टोरेंट, किराना और कपड़ों की दुकानों समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की जांच की जाएगी।
नगर निगम के अनुमान के मुताबिक शहर में 12 हजार से ज्यादा ऐसी संपत्तियां हो सकती हैं, जहां आवासीय टैक्स जमा किया जा रहा है, लेकिन संपत्ति का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है। निगम का दावा है कि इस तरह के व्यावसायिक उपयोग की सही जानकारी नहीं होने से हर साल करीब 5 से 10 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
लीडार सर्वे के बाद होगा भौतिक सत्यापन
नगर निगम सितंबर के अंतिम सप्ताह या अक्टूबर के पहले सप्ताह से सर्वे शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए लीडार सर्वे कराया जाएगा। कंपनी का चयन होने के बाद सर्वे का काम शुरू किया जाएगा।
नगर निगम की राजस्व उपायुक्त डॉ. अंजलि शर्मा के मुताबिक सर्वे के साथ भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि संपत्ति का वास्तविक इस्तेमाल किस उद्देश्य से हो रहा है और उसके अनुसार संपत्ति मालिक टैक्स जमा कर रहा है या नहीं।
अगर किसी मकान पर आवासीय टैक्स जमा किया जा रहा है, लेकिन वहां व्यावसायिक गतिविधि संचालित मिलती है, तो संबंधित संपत्ति मालिक को व्यावसायिक टैक्स का डिमांड नोटिस और पेनाल्टी जारी की जाएगी।
संपत्ति सर्वे को लेकर सियासत भी तेज
नगर निगम के इस प्रस्तावित सर्वे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने आरोप लगाया कि निगम जनता से टैक्स वसूली पर तो जोर दे रहा है, लेकिन जलभराव, बिजली और सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
वहीं MIC सदस्य दीपक जायसवाल ने विपक्ष के आरोपों को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि कमर्शियल इस्तेमाल वाली संपत्ति पर रेजिडेंशियल टैक्स जमा करना गलत है। इसी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम सर्वे कराएगा और नियमों के मुताबिक कार्रवाई करेगा।
अब सर्वे शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि रायपुर में कितनी संपत्तियां आवासीय दर्ज होने के बावजूद व्यावसायिक इस्तेमाल में हैं। साथ ही यह भी सामने आएगा कि निगम की कार्रवाई से राजस्व में कितनी बढ़ोतरी होती है।
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